जानिए RAJ COMICS और भारत के सबसे बड़े COMIC सुपरहीरो NAGRAJ के बारे में सब कुछ।

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Raj Comics Superhero - Nagraj

NAGRAJ भारतीय COMICS जगत का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध फिक्शनल केरेक्टर हैं। NAGRAJ के केरेक्टर ने भारतीय COMICS जगत में जितनी प्रसिद्धि हासिल की है उतनी किसी ओर ने नहीं की। ना सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों के COMICS रीडर भी NAGRAJ को अच्छी तरह से जानते हैं। NAGRAJ पर पहली कहानी लेखक परशुराम शर्मा ने लिखी और इसे कागज पर सजीव रूप संजय गुप्ता की RAJ COMICS ने दिया। NAGRAJ वो केरेक्टर हैं जिसने RAJ COMICS को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाया है। और ये केरेक्टर आगे भी RAJ COMICS को कई बुलंदियों तक पहुंचाएगा।

Nagraj – Raj Comics Superhero

NAGRAJ अपने शुरुआती दौर में एक किलिंग मशीन था और उसका पालन पोषण भी उसे खूनी और हत्यारा बनाने के लिए ही किया गया था। लेकिन बाद में NAGRAJ को एक खलनायक से मानवता की रक्षा करने वाले सुपरहीरो में बदल दिया। NAGRAJ के जन्म से जुड़ी कहानी बेहद अद्भूत और ऐतिहासिक हैं जिसका एक COMICS ब्लॉगर होने के नाते जिक्र करना बेहद जरूरी है।
वैसे तो सभी NAGRAJ के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन फिर भी हम उसके अतीत और शुरुआती सफर को एक सीधी कड़ी में यहां पेश कर रहे हैं ताकि पुराने COMICS पाठक NAGRAJ से जुड़ी अपनी यादों को ताज़ा कर सके और नए COMICS पाठक आसानी से अपने आपको NAGRAJ से जोड़ सके।

आज हम अपने आर्टिकल में NAGRAJ के जन्म और शुरुआती सफर को जानेंगे।

NAGRAJ का जन्म

Khazana – A Scene from Raj Comics

प्राचीन काल में तक्षकनगर नाम से एक राज्य हुआ करता था जिसके राजा का नाम तक्षकराज और रानी का नाम ललिता था। दोनों ही राजा-रानी की ईमानदार और न्यायसंगत छवि थी और उनके राज्य की जनता उन्हें बहुत प्यार और सम्मान देती थी। उनका राज्य भी हर तरह की सुख और सुविधा से संपन्न था और लोग भी आराम से अपनी ज़िन्दगी गुज़ार रहे थे। समय गुजरता गया लेकिन रानी ललिता को कोई बच्चा या बच्ची पैदा नहीं हुआ। इस वजह से राजा-रानी काफी चिंतित रहते थे। दोनों को इस राज्य के अगले वारिस की चिंता सताने लगी। राजा तक्षकराज का पूरा परिवार देव कालजयी का परम उपासक था और उनकी पूरी पीढ़ी देव कालजयी की पूजा करती थी। देव कालजयी दो मुंह वाले नाग देवता थे जिनका राजा तक्षकराज के पुरखो ने अलग से मंदिर बनवाया था और उनकी सुरक्षा में ही राज्य का सारा खज़ाना भी रखा था। रानी ललिता की 25 सालो की कड़ी उपासना से प्रसन्न होकर देव कालजयी ने उन्हें बेटे का आशीर्वाद दिया। जिसके बाद जल्दी ही रानी ललिता गर्भवती हो गई। रानी ललिता के गर्भवती होने से पूरे तक्षकनगर में खुशियां मनाई गई और राज्य के लोग भी बहुत खुश थे। लेकिन राजा तक्षकराज का छोटा भाई नागपाशा इस खबर से बिल्कुल भी खुश नहीं हुआ। नागपाशा एक नम्बर का अय्याश और भोग विलासिता की ज़िन्दगी जीने वाला इंसान था। और वो भी किसी तरह तक्षकनगर का राजा बनना चाहता था। अभी तक उसके मार्ग में किसी तरह की कोई रुकावट नहीं थी क्यूंकि राजा-रानी का कोई बेटा/बेटी नहीं था, ऐसे में राज्य की गद्दी उसे ही मिलती। लेकिन रानी ललिता के गर्भवती हो जाने से नागपाशा को अपने हाथ से तक्षकनगर का सिंहासन जाते दिखा। गुस्साए नागपाशा ने रानी ललिता का गर्भ गिराने की चाल चली। चूंकि देव कालजयी के आशीर्वाद से रानी ललिता गर्भवती हुई थी, इसलिए वो सीधे रानी का गर्भ गिराने खतरा मोल नहीं ले सकता था। ऐसा करने पर उसे देव कालजयी के क्रोध का सामना करना पड़ता। इसलिए नागपाशा ने एक कुटिल चाल चली।

Khazana – Title Cover of Raj Comics

रानी ललिता रोजाना देव कालजयी की पूजा करने उनके मंदिर जाती थी, इसलिए नागपाशा ने एक दिन चुपके से उनकी पूजा की थाली को बदल दिया जिसने एक मरा हुआ नेवला था। अपने भोग में मरा नेवला देखकर देव कालजयी भड़क उठे और उन्होंने रानी ललिता पर अपने घातक जहर हलाहल का प्रहार कर दिया। रानी ललिता जहर के प्रभाव से उसी वक्त बेहोश हो गई। जब ये बात राजा तक्षकराज को पता चली तो उन्होंने देव कालजयी से अपना जहर वापस लेने का अनुरोध किया लेकिन देव कालजयी ने उनकी बात ठुकरा दी। अपनी प्रिय पत्नी को मौत के नजदीक देखकर राजा तक्षकराज जान देने के लिए सिर पटकने लगे। अब यह देख देव कालजयी का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने राजा तक्षकराज को एक विकल्प दिया। वे या तो अपनी पत्नी को बचा सकते थे या अपने बच्चे को। राजा तक्षकराज ने बिना देर किए अपनी पत्नी की जान को बचाने का आग्रह किया। इसके बाद देव कालजयी ने राजा तक्षकराज को एक मणि दी जिसका दवा के तौर पर इस्तेमाल करना था। मणि के प्रयोग से रानी के शरीर में फैला सारा जहर उसके बच्चे में चला जाएगा जिससे रानी तो स्वस्थ रहेगी लेकिन बच्चा मरा हुआ पैदा होगा। मणि के प्रयोग से रानी ललिता के शरीर का सारा जहर उसके पेट में पल रहे बच्चे में इक्क्ठा हो गया और रानी स्वस्थ हो गई। प्रसव के बाद रानी ललिता को मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ जो कि पूरी तरह नीले रंग का था। चिकित्सकों ने भी बच्चे को मरा हुआ घोषित कर दिया।

A Scene from Raj Comics

हिन्दू रीति रिवाज के तहत अब बच्चे को पानी में बहा दिया गया। दूसरी तरफ नागपाशा भी अपनी योजना में कामयाब हो चुका था। उसके सिंहासन पाने के रास्ते में अब कोई अड़चन नहीं थी। राजा बनने के मद में चूर नागपाशा देव कालजयी के मंदिर में गया और उनसे खज़ाना और तक्षकनगर का सिंहासन मांगा। देव कालजयी ने ये कहकर उसकी इस मांग को ठुकरा दिया कि तक्षकनगर और उसके खज़ाने का वारिस अभी ज़िंदा हैं और समय आने पर उसे ही सिंहासन की गद्दी सौंपी जाएंगी। ये सुनकर नागपाशा गुस्से से पागल हो गया और उसने अपनी तलवार निकालकर देव कालजयी को मारने कि कोशिश की। लेकिन उनके फन की टक्कर से वो सीधा पास रखे दो कटोरों पर जा गिरा जिसमें एक के अंदर हलाहल जहर था और दूसरे में अमृत। जहर के प्रभाव से उसका चेहरा गल कर सड़ गया जबकि अमृत के प्रभाव से वो अमर हो गया। जहर की मात्रा अधिक होने से वो वहीं बेसुध होकर गिर पड़ा। राजा तक्षकराज जब अपने बच्चे को पानी में बहाकर लौटे तो उन्हें इन सब घटना कि जानकारी मिली और ये भी पता चला की उनका बच्चा जीवित हैं। उन्होंने खज़ाने की सुरक्षा के लिए वेदाचार्य को एक ऐसा तिलिस्म रचने के लिए कहा जिसे भविष्य में सिर्फ उनका बच्चा ही तोड़ सके। वेदाचार्य ने उनके कहे अनुसार मंदिर में ऐसा तिलिस्म बनाकर खज़ाने को सुरक्षित कर लिया। बाद में जब नागपाशा को होश आया तो उसने राजा तक्षकराज़ और रानी ललिता की हत्या कर डाली। लेकिन उसके बाद भी उसके हाथ ना वो खज़ाना लगा और ना वो तक्षकनगर का राजा बन पाया। इसके बाद नागपाशा वहां से भाग गया।

मुश्किलों से झूंझता नागराज का जीवन।

अब दूसरी ओर पानी में बहता ये बच्चा बहुत दूर निकल आया और झाड़ीयो में फंस गया। कई सालो तक उसी अवस्था में रहा। फिर देव कालजयी ने नागद्वीप के राजा मणिराज और रानी मणिका को सपने में आकर उस बच्चे के झाड़ियों में फंसे होने की जानकारी दी। देव कालजयी ने राजा मणिराज को उस बच्चे की चिकित्सा और देखभाल करने का आदेश दिया। जब राजा मणिराज का सपना टूटा तो उन्होंने उस जगह की खुद तलाश की और उन्हें वो बच्चा वहा बुरी हालत में मिला। ये बच्चा पूरी तरह से नीले रंग का था। राजा मणिराज समझ गए कि इस बच्चे में दुनिया का सबसे ख़तरनाक जहर है। लेकिन राजा मणिराज सपने के आधार पर उस बच्चे को नागद्वीप नहीं ला सकते थे क्यूंकि महात्मा कालदूत ने बाहर के किसी भी बाहरी को नागद्वीप पर लाने से मना किया था। पर फिर भी दोनों राजा रानी चुपके से उस बच्चे को नागद्वीप ले आए। अब यहां बच्चे का कई वर्षों तक उपचार किया गया और अब वो स्वस्थ था। उस बच्चे के शरीर का रंग भी नीले से सामान्य हो गया था। इतने वर्षों तक बच्चे के नजदीक रहने से दोनों राजा रानी को उससे प्यार हो गया और उन्होंने उसे गोद ले लिया।

राजा मणिराज और रानी मनिका के बच्चे को गोद लेने का सभी नागद्वीप वासियों ने समर्थन किया। लेकिन ये बात नागद्वीप के ही एक नाग विषधर को पसंद नहीं आयी और उसने उस बच्चे को वहां से अगवा कर लिया। लेकिन महात्मा कालदूत की सजा से डरकर उसने बच्चे को मारा नहीं बल्कि वापस उसी झाड़ियों में छोड़ दिया। इसी बीच रानी मनिका भी गर्भवती हो गई और उन्होंने विसर्पी को जन्म दिया।

नागराज की ज़िन्दगी का नया सफर।

Nagraj First Comics – Raj Comics

इस बच्चे की उम्र भी करीब 80 साल की हो गई थी लेकिन आकार में वो बच्चा छोटे बेबी की तरह ही रहा। अब झाड़ियों में पड़े इस बच्चे की सुरक्षा के लिए देव कालजयी ने एक नागसेवक को नियुक्त किया जो एक सही समय देखकर उसेवेक जंगली टापू पर बने मंदिर में ले आया। कुछ देर बाद एक वैज्ञानिक प्रोफेसर नागमणि सांपो के जहर की खोज में उधर आया। जब उसे एक बच्चे के रोने की आवाज अाई तो वो मंदिर गया। अब यहां पुजारी के रूप में बच्चे की रक्षा कर रहे नाग ने उसे झूठी कहानी सुनाई की इस बच्चे को एक अबला औरत यहां छोड़ गई है। उस नाग ने प्रोफेसर नागमणि को बच्चे के पालन पोषण की जिम्मेदारी दी। नाग ने प्रोफेसर नागमणि को एक हजार सांपो से बच्चे को डसवाने और उसके बाद अपने शरीर की भस्म खिलाने को कहा।

प्रोफेसर नागमणि इस बच्चे को लेकर अपने घर आ गया। जब उसने इस बच्चे की जांच की तो उसे पता चला कि इसके शरीर में खून की जगह छोटे छोटे सूक्ष्म सर्प बह रहे हैं। प्रोफेसर नागमणि ने उस इच्छाधारी नाग के कहे अनुसार 1000 अलग अलग सांपो के जहर का इंजेक्शन लगाया और बाद में उस नाग की भस्म खिलाई। भस्म खाते ही बच्चे का रंग हरा हो गया। इसके बाद प्रोफेसर नागमणि ने बच्चे की देखभाल की और उसे NAGRAJ नाम दिया।

इसके बाद प्रोफेसर नागमणि ने NAGRAJ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की सोची और उसके दिमाग का ऑपरेशन करके उसमे एक कैप्सूल फिट कर दिया ताकि NAGRAJ उसी का गुलाम बना रहे। अब प्रोफेसर नागमणि ने NAGRAJ को किलिंग मशीन बना दिया। NAGRAJ के पास उस समय तक बहुत सीमित मात्रा में नाग शक्तियां थी जैसे कि कलाई से सांप का छोड़ना, सांपो की सर्प रस्सी की तरह इस्तेमाल करना, विष फुंकार छोड़ना, दीवारों पर चिपकना आदि। NAGRAJ में जबरदस्त शारीरिक शक्ति थी और वो बड़े से बड़े पहलवान को पीट सकता था।

खलनायक नागराज नहीं, विश्व रक्षक नागराज।

Superhero Nagraj – Raj Comics

सभी विधाओं को सिखाने के बाद प्रोफेसर नागमणि ने NAGRAJ को किराए पर देने की घोषणा की और दुनिया के सभी आतंकवादियों को रंगून बुलाया। यहां NAGRAJ की एक मिशन के लिए बोली लगाई गई। एक लाख डॉलर में बुल्डोग नाम के आतंकी ने NAGRAJ को अपने मिशन के लिए किराए पर ले लिया। बुल्डोग NAGRAJ को असम के जंगलों में ले गया और एक कबीले से मूर्ति को चुराकर लाने को कहा। NAGRAJ ने बुल्डोग के कहे अनुसार मूर्ति चुरा ली लेकिन रास्ते में बाबा गोरखनाथ और शिकांगी नेवले ने NAGRAJ को रोक लिया। बाबा गोरखनाथ ने NAGRAJ को बेहोश कर उसके दिमाग से वो कैप्सूल निकाल दिया जिसकी वजह से वो प्रोफेसर नागमणि का गुलाम बना हुआ था। कैप्सूल निकाले जाने के बाद NAGRAJ को अपने अस्तित्व का अहसास हुआ। उसने बाबा गोरखनाथ को इसका धनवाद दिया। बाबा गोरखनाथ भी अपनी तपस्या में वापस चले गए। बाद में NAGRAJ ने बुल्डॉग को मार दिया। यहां से NAGRAJ ने आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया और दुनिया की यात्राएं करनी शुरू कर दी।

इसके बाद NAGRAJ के कदम जहां पड़े वहां से आतंकवाद और अपराधियों का खात्मा हो गया। अपने आतंकवाद उन्मूलन अभियान के दौरान NAGRAJ ने किसी आतंकवादी को नहीं बख्शा बल्कि सभी को जान से मार दिया। बाद में NAGRAJ ने अपने खज़ाने को प्राप्त किया इसके लिए उसने नगीना, विषधर और नागपाशा जैसे खलनायको से लोहा लिया व इन्हे परास्त किया। अपने अतीत को जानने के दौरान NAGRAJ को वेदाचार्य और भारती जैसे विश्वस्त दोस्त मिले। देव कालजयी ने वरदान स्वरूप NAGRAJ को नागफनी सर्प प्रदान किए। इसके बाद भारती की सहायता से NAGRAJ ने भारती कम्यूनिकेशंस कंपनी का निर्माण किया और उसके बाद वो महानगर में ही बस गया। इसके बाद हमने NAGRAJ को सिर्फ ऊंचाइया छूते देखा और NAGRAJ अभी भी नई नई ऊंचाइयों को छूता जा रहा है।

NAGRAJ के ऊपर बनाए गई इस ऐतिहासिक कहानी के लिए RAJ COMICS को शत शत प्रणाम।

NAGRAJ को जानने के लिए आपको NAGRAJ, NAGRAJ की कब्र, NAGRAJ का बदला, नागपाशा और खज़ाना COMICS पढ़नी चाहिए

NAGRAJ के जीवन से जुड़े खास पल।

  1. NAGRAJ की असली उम्र 100 साल से भी ज्यादा है।
  2. NAGRAJ के बचपन की COMICS का चेहरा देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। 20 साल के NAGRAJ को देखना अपने आप में अलग ही अनुभव है।
  3. NAGRAJ शिकांगी नेवले से पहली मुलाक़ात में ही हार गया था।
  4. NAGRAJ का पहला दोस्त शराबी रोमो था।
  5. NAGRAJ को सबसे पहले सुवांगनी नाम की महिला ने काटा और वो गलकर मर गई।

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